विनोद सेवनलाल चन्द्राकर

परिवार भारत के आजादी के बाद से ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़ा रहा और समाज सेवा के कार्य में लगा रहा। पिता श्री सेवनलाल चन्द्राकर जी वर्ष 1977 में कांग्रेस से जुड़े और आज पर्यन्त कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुये हैं। सन् 2001-2004 तक जिला कांग्रेस कमेटी, महासमुन्द के जिला सचिव के रूप में पार्टी को अपनी सेवायें दी । मैंने स्वयं कांग्रेस पार्टी से जुड़कर पार्टी के सभी गतिविधियों में अपने तन-मन से योगदान देते रहा। जब कांग्रेस पार्टी की सरकार थी, तब सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं और कांग्रेस पार्टी की रीति-नीति को जनता तक पहुंचाते रहा। प्रदेश की वर्तमान भ्रष्ट भाजपा सरकार की काली करतूतों के खिलाफ तथा किसानों, मजदूरों के हितों और अधिकारों से उनको वंचित रखने के लिये शासन के विरूध्द अपनी हकों के लिये जन-आन्दोलन करते रहा हूँ। जिला लघु वनोपज यूनियन, महासमुन्द के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत् होने के कारण मजदूर ग्रामीण वनवासी भाइयों के हित के लिये भी अनवरत संघर्षरत हूं।
समाज सेवा के प्रति निःस्वार्थ भाव से तटस्थ होने के कारण समाजिक स्तर पर भी युवा अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज, रायपुर राज के रूप में सन् 2010 में निर्वाचित हुये और 2012 तक निःस्वार्थ रूप से समाज को अपनी सेवाएं दी। पारिवारिक - राजनीति पृष्ठभूमि

सामाजिक एवं सहकारी क्षेत्रों में सहभागिता

कोई भी राजनीतिज्ञ अपनी अच्छी सामाजिक एवं आर्थिक सोच से, अपने समाज को नई दिशा और दशा प्रदान करते हैं। मैं सामाजिक व्यक्ति हूं एवं सदा समाज से जुड़ा रहा हूं । सभी वर्गों एवं धर्मों के प्रति मेरी गहरी आस्था है ।
मैं एक किसान पुत्र हूं और कृषि कार्य ही मेरा मुख्य व्यवसाय है। अतः सहकारिता के महत्व को भली-भांति समझता हूं, इसलिये कृषि एवं अन्य ऐसे ही सहकारिता से संबंधित संस्था या विभाग में जनता से जुड़े जमीनी हितों के लिये कार्य करना, इस क्षेत्र में व्याप्त विसंगतियों को दूर करना मेरा ध्येय रहा है। सहकारिता के संबंध में मेरा नजरिया हमेशा यह रहा है कि प्रदेश में उपलब्ध खनिज संसाधनों एवं वन संसाधनों का उपभोग एवं दोहन सहकारी संस्थाओं के माध्यम से हो और इसका पूरा-पूरा लाभ स्थानयीय लोग एवं वनवासी ग्रामीणों को मिल सके।
विभिन्न संसाधनों की क्षेत्रीय उपलब्धता के आधार पर उस क्षेत्रा को उसके अनुरूप विकसित किया जाना चाहिये, जिससे उसका समुचित और लाभगत् तरीके से उपयोग हो सके। इसके लिये मैनें महासमुन्द जिले में हर्बल उत्पाद को बढ़ावा देने का काम, लाख पालन हेतु लाख प्रसंस्करण केन्द्रों का आरंभ, आंवराडबरी के कुछ वनक्षेत्रा को लोक संरक्षित क्षेत्रा के रूप में विकसित करना आदि कार्य मेरे जिलाध्यक्षीय कार्यकाल में धरातल स्तर पर शुरू हो चुके हैं ।

योजनायें

गढ़बो नवा छत्तीशगढ़